Published on: 20 May 2026
प्रभावी संचार के लिए संचार कौशल व व्यक्तित्व का संयोजन जरूरीः प्रो. सुनील।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी में मानविकी संकाय व व्यावहारिक और संज्ञानात्मक विज्ञान संकाय के संयुक्त तत्वावधान में "संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास" पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वक्ताओं ने संचार, संप्रेषण, जन संचार व व्यक्तित्व विकास के बहुआयामों पर विस्तार से चर्चा की।कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार ने कहा कि संचार मानव जीवन का आधार है। किसी भी प्रकार के विचार, संदेशों या भावनाओं के बिना मानव जीवन अकल्पनीय है। संचार प्रेषक के लिए अपनी बातों को प्रभावी ढंग से रखना बहुत महत्वपूर्ण है। संचार कौशल और व्यक्तित्व के संयोजन से ही प्रभावी संचार की रूपरेखा तय होती है।
कार्यशाला में बतौर वक्ता अधिष्ठाता, मानविकी संकाय, प्रोफेसर निखिलेश यादव ने मनुष्य के व्यक्तित्व विकास के लिए भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संयमित मन, अनुशासित शरीर व भाषा के संयोजन से व्यक्तित्व विकास पर प्रकाश ड़ाला। उन्होंने अंतः वैयक्तिक संचार व अंतर-वैयक्तिक संचार के पहलुओं को विस्तार से समझाया।व्यावहारिक और संज्ञानात्मक विज्ञान संकाय अधिष्ठाता डॉ. बिजेंद्र सिंह ने जन संचार की बारीकियों पर जोर देते हुए संदर्भित भाषण, शारीरिक हाव-भाव, आवाज में उतार-चढ़ाव, दर्शकों के साथ तालमेल बनाते हुए प्रभावी संचार के विभिन्न तत्वों का वर्णन किया।
मनोवैज्ञानिक विभाग से डाॅ. संदीप कुमार ने कहा कि संचार केवल बोलने तक सीमित नही है, बल्कि यह मन, भावनाओं और मानवीय व्यवहार को समझने से संबंधित है। उन्होंने शाब्दिक व अशाब्दिक संचार के महत्व पर भी विचार रखे। अंग्रेजी विभाग प्राध्यापक डाॅ. विनय कुमार ने संचार के लिए भाषा कौशल, विभिन्न अवरोधकों, औपचारिक व अनौपचारिक संचार के तत्वों पर प्रकाश डाला।
अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रोमिका बत्रा सुखीजा ने अपने वक्तत्व में मानवीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए संचार कौशल की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाषा के साथ साथ बोलने की शैली व लहजे में संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। बेहतर संचार ही मजबूत मानवीय रिश्तों व जीवन में उल्लास का पर्याय है। कार्यशाला समापन पर उन्होंने सभी वक्ताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सेमिनार व कार्यशालाओं को निरंतर आयोजित कराया जाना चाहिए।मंच संचालन शोधार्थी प्रीति ने किया। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष डाॅ. मंजू पूरी, डाॅ. अर्चना, रोहित यादव, शोधार्थी पारूल, रोहित, एकता, ज्योति, कुुसुम, सुभाष, मीनाक्षी, रामप्रकाश, किरण, निशा, स्वाति, मेघा सहित समस्त स्टाॅफ सदस्य व विद्यार्थी मौजूद रहे।